*कजलियां यानी सावन के महीने में रक्षाबंधन के ठीक अगले दिन पारंपरिक गीतों और एक-दूसरे से मिलने-मिलाने का एक त्योहार। यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता था, मगर आज आधुनिकता की दौड़ में और लोगों की व्यस्तता ने इस त्योहार को समेट दिया है।*


*गेहूं, जौ, बांस के बर्तन और खेत की मिट्टी इस त्यौहार में ख़ासा महत्व रखते हैं। महिलाएं नागपंचमी के दूसरे दिन खेत से मिट्टी लेकर आतीं और बांस के बर्तन में गेहूं या जौ बोती थीं, रक्षाबंधन तक इन्हें पानी दिया जाता, इनकी देखभाल की जाती, इसमें उगने वाले जौ या गेहूं के छोटे-छोटे पौधों को ही कजलियां कहा जाता है।*
*क्राइम खुलासा न्यूज़ जिला ब्यूरो ललितपुर रामजी तिवारी*
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