जनता की चुप्पी से प्रत्याशियों की बढ़ी बेचैनी....राजनीतिक चर्चाओं का चला दौर...
(सुबह शाम बाजारों में चाय पान की दुकानों पर लग रही भीड़)
पांचवें चरण के विधानसभा चुनाव के बाद प्रत्याशियों के भाग्यपेटी बंद हो गई हैl इस बार का उत्तर प्रदेश का चुनाव बहुत ही शालीनता के साथ बीत रहा है जिसका मुख्य कारण जनता का मौन साधना हैl इसके पूर्व जनता ज्यादातर चुनाव में अपने मतों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर दिया करती थी परंतु इस बार ऐसा कतई नहीं हुआl मतदाताओं ने चुनाव के चर्चा के दौरान कहा कि आखिर क्यों हम एक दूसरे से बुराई लें जिससे वोट देना है उसे दे दिया गया है और वह जीत भी जाएगाl जनता मतदान करने के बाद भी खामोशी की चादर लपेटे हुए हैंlमतदाता हर प्रत्याशी को चाहे वह किसी राष्ट्रीय दल से हो या चाहे वह निर्दलीय हो सभी को आश्वासन की घुट्टी दे रहा हैlखासकर यमुनापार की चारों विधानसभा सीट का यही हाल हैl अमूमन वोट पड़ने के बाद प्रायः मतदाताओं का रुझान समझ में आ जाया करता था परंतु इस बार ऐसा नहीं है कौन किसके पक्ष में हैं यह बताना मुश्किल सा हो गया हैlपिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार मतदान का प्रतिशत भी कम हुआ है जिसके कारण प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हो गई हैं l सभी प्रत्याशी एवं उनके समर्थक अपनी बेचैनी को कम करने के लिए गांवों के हिसाब से गुणा गणित कर अपने को जीता हुआ प्रदर्शित कर रहे हैंl तमाम अटकलों के बीच आखिर कौन होगा उत्तर प्रदेश का बादशाह और किसे जनता पसंद करती है इन सवालों का जवाब आगामी 10 मार्च को मिल जाएगाl
रिपोर्ट :-रजत केशरवानी प्रयागराज