महरौनी(ललितपुर)- महर्षि दयानन्द सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी के तत्वाधान में संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य मंत्री आर्य समाज द्वारा आयोजित भारत की आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में समायोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम में प्रथम दिवस में आचार्य श्री ने "भारतीयसंस्कृति में स्वस्ति एवं शान्ति का संदेश" प्रस्तुत विषय में बेबिनार में बोलते हुए विविध पक्षों की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि
"भारत शब्द की अनुपम व्याख्या-" "भा" का अर्थ है- प्रकाश,ज्योति,विद्या,ज्ञान,विज्ञान,भाल,भास्कर और भाग्य तथा "रत" का अर्थ है-संलग्न रहना।जिस देश के निवासी अपने जीवन में प्रकाश के पथानुगामी हैं,ज्योति की दीप्ति के उपासक हैं,विद्याविलास में उल्लसित हैं,ज्ञान की आराधना में अनवरत समाहित हैं,विज्ञान के अनुसंधान में निमग्न हैं,जिनके भाल विद्यातेज से विभासित हैं,जो भास्कर की विभा के परमोपासक हैं और जो भाग्य और पुरुषार्थ में विश्वास करते हैं।
"भारतीयसंस्कृति का विशेष भाव-" आचार्य जी ने भारतीय शब्द का निरूपण करते हुए कहा कि भारत शब्द में ईय प्रत्यय लगकर "भारतीय"शब्द बनता है।
मुझे अपने भारतीय होने का पूर्ण गर्व है,मुझे भारतीय संस्कृति में विश्वास है,मुझे भारतीय संस्कारों में श्रद्धा है,मुझे भारतीय सभ्यता में निष्ठा है,मुझे भारतीय पर्वों से प्रेम है,मुझे भारतीय धार्मिक भावनाओं में अतिशय अनुराग है,मुझे भारतीय महापुरुषों के पावन जीवनचरित्र से अपार प्रेम है और मुझे भारतीय सनातन विरासत पर स्वाभिमान है।
"संस्काराणां भावः संस्कृति:" संस्कारों का आन्तरिक स्वरूप ही संस्कृति है।हमारी भारतीय संस्कृति मानवजीवन के दिव्य एवं उदात्त गुणों से अलंकृत है।
उन्होंने कहा कि "- स्वस्ति एवं शान्ति का संदेश"
भारतीय संस्कृति में मानव के परम कल्याण के लिए स्वस्ति और शान्ति का संदेश संनिहित है।जो सुंदर है,जो श्रेष्ठ है,जो मंगलकारी है,जो अभ्युदय करने वाला है,जो नि:श्रेयस का दर्शक है,वही परम दिव्यभाव स्वस्ति का है।
हम स्वस्ति के मार्ग का अनुसरण करें।सदा स्वस्ति का वाचन करें।सर्वदा स्वस्ति का मंगलगान करें और हमेशा स्वस्ति को प्राप्त हों।
शांति की प्रार्थना और कामना भारतीय संस्कृति का महान संदेश है।आचार्य जी ने अनेक वेदमंत्रों,उपनिषद् के उपदेशों,गीता के श्लोकों,रामायण के पावन प्रसंगों और प्रेरक कथानकों के द्वारा सबका मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अवनीश मैत्रि वेदकला संवर्धन परमार्थ राजस्थान,मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ, डॉ राजेन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव प्राचार्य, डॉ राकेश नारायण द्विवेदी, डॉ प्रमोद कुमार शर्मा, बृजेन्द्र नपित शिक्षक,अरविंद सेन आर्य आदि का विशेष सहयोग रहा।
संचालन संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य एवं आभार रामसेवक निरंजन शिक्षक ने जताया।
पं रामजी तिवारी मडावरा
जिला ब्यूरो क्राइम खुलासा न्यूज़ ललितपुर