*राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस पर  नगर की दो बस्तियों में निकला पथ संचलन*

 म.प्र. आगर मालवा- अंकित दुबे ,,  नगर नलखेडा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के स्थापना दिवस एव  विजयादशमी उत्सव पर दो बस्तियों में प्रभावी संचलन निकाला गया, केशव एवं मधुकर बस्ती का एकत्रीकरण सागर विद्या निकेतन स्कुल में  तथा माधव बस्ती एवं सुदर्शन बस्ती का एकत्रीकरण माधव कुंज जायसवाल कालोनी रखा गया था, दोनों पथ संचलन अपनी बस्तियों के मुख्य मार्ग से होते हुए अपने समापन स्थान पर पहुचे | माधवबस्ती में स्वयंसेवको को जिला प्रचार प्रमुख श्री राजेश जी मेडतवाल का उदबोधन प्राप्त हुआ मंच पर माननीय खंड संघचालक श्री गोविन्द जी राठोर भी उपस्थित थे | दोनों अतिथियों द्वारा शस्त्र पूजन किया गया तत्पश्चात उपस्थित स्वयंसेवको को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता श्री राजेश जी मेड़तवाल द्वारा अपने उद्बोधन में कहा की पिछले नो दिनों से शक्ति की साधना का पर्व चल रहा था, आज ही विजयदशमी के दिन प्रभु श्री राम ने अधर्म पर विजय प्राप्त कर धर्म की स्थापना की, वनवास के समय रावण द्वारा माँ सीता का हरण किया गया था, प्रभु श्री राम चाहते तो रावण का कभी भी अंत कर सकते थे | किन्तु भगवान श्री राम जी ने वनों से वानरों, रिछो को संघठित कर आताताई रावण का वध किया | संघठित कार्य शक्ति द्वारा ही भारत को परमवैभव तक पहुचना है, विश्व में 49 संस्कृतियो ने जन्म लिया परन्तु भारत की संस्कृति आज भी अमर है, भारत हर क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करता था, तथा हर कार्यो में हजारो वर्षो भारत अग्रणी रहा | सिकंदर यूनान से भारत की धरती पर आया, परन्तु  इस भरत भू पर, पोरस के द्वारा पराजित होकर उलटे पैर अपने देश लोट गया | इसी प्रकार अनेको आतातई ग्रीक, हुण, शक, यवन मुग़ल एवं अंग्रेज आदि इस भरत भू पर आये, सभी का भारत की धरती में विलय हुआ | भारत कभी पराजित नही हुआ इसी प्रकार भारत का 1200 वर्षो का इतिहास रहा है | वर्ष 1925 में संघ की स्थापना हुई उसके पूर्व हेडगेवार जी बंगाल में क्रांतिकारियों के साथ मिलकर देश को आजाद कराने में लगे हुए थे | उन्होंने ने भारत की संस्कृति का अध्यन किया उस समय सभी जाति संघठन अपने अपने हिसाब से कार्य कर रहे थे परन्तु हिन्दू समाज को कोई संघठित नही कर पा रहा था, तब श्री हेडगेवार जी ने गहनता से विचार किया इस प्रकार के आंदोलनो से मूल समाज का भला होने वाला नही है इस हिन्दू समाज को संघठित करना है तो समाज में संघठन करना ही पड़ेगा इसी उदेश्य को लेकर पूजनीय डॉक्टर हेडगेवार जी ने वर्ष 1925 में विजयादशमी दिनराष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की | संघ कार्य ईश्वरीय कार्य है ईश्वरीय कार्य धर्म की स्थापना,  महाभारत काल में श्री कृष्ण ने धर्म की स्थापना की थी, कलयुग में संघ यही कार्य कर रहा है | जब जून वर्ष 1975 में लोकतंत्र की हत्या करके इमरजेंसी लगी थी ऐसे समय में स्वयंसेवक द्वारा भूमिगत रहकर संघ कार्य किया गया | वर्ष 1992 में श्रीराम जन्मभूमि का कलंक बाबरी मस्जिद को ढहाया गया वही पर भव्य भगवान श्रीराम जी का मंदिर बनने हा रहा है, | तात्कालिक सरकार द्वारा श्री राम सेतु को तोड़ा जा रहा था उसे भी संघठन की शक्ति द्वारा बचाया गया | इसी प्रकार वर्ष 1925 से समाज को संघठित करने का कार्य किया जा रहा है | प्रत्येक घर तक संघ कार्य पहुच गया है संघ संघठित समाज का आदर्श स्वरूप है |  संघ तीन आगामी कार्य सामाजिक समरसता , पर्यावरण संरक्षण एवं कुटुंब प्रबोधन है,| कम्युनिस्टो, नक्सलवादियों के द्वारा भारत को जातिगत रूप से केसे तोडा जाये, ऐसा षडयंत्र रचा जा रहा है इसलिये यह प्रायोगिक विषय है की आस पास सामाजिकता बनी रहे | जब महात्मा गाँधी वर्ष 1934 में वर्धा के अंदर संघ की शाखा में गये तब वंहा का अनुशासन तथा समरसता का भाव देखकर के गाँधी जी गद गद हो गये और उनके द्वारा समरसता की तारीफ की गई | कुटुंब प्रबोधन पर कहा मेरी मार्गेट ने कहा की कुटुंब रचना भारत से सीखना चाहिये | पश्चिम का प्रभाव भारत पर आ रहा है इसलिये कुटम्ब व्यवस्था में सुधार करना अतिआवश्यक है | पर्यावरण विषय पर बोलते हुए श्री मेड़तवाल ने कहा कि पर्यावरण मनुष्य का आधार है, पर्यावरण को सुरक्षित रखना ही हमारी जिम्मेदारी है जेसे जल संरक्षण, पोधारोपण, पलास्टिक का कम उपयोग करना | इस प्रकार सामाजिक समरसता , पर्यावरण संरक्षण एवं कुटुंब प्रबोधन पर विस्तृत रूप से स्वयंसेवको को मार्गदर्शन दिया गया उक्त जानकारी प्रचार विभाग द्वारा दी गई |
खास रिपोर्ट अंकित दुबे 
स्टेट मीडिया प्रभारी मध्य प्रदेश
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