*राज्य-सरकार से मांगी स्वैच्छिक सेवानिवृति।*
*चंडीगढ़(हरियाणा)।*"जनम मोरा बातहिं बीत गयो रे,तूने कबहुँ न कृष्ण क़ह्यो।।" उक्त चंद लाइनें हरियाणा पुलिस में शीर्ष अधिकारी और वर्तमान में अंबाला रेंज की पुलिस महानिरीक्षक(IG) *भारती अरोड़ा* पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं।इस तेजतर्रार महिला आईपीएस अधिकारी की अभी दस वर्ष(2031 तक) की पुलिस सेवा शेष है और इन्होंने अब *भगवान श्रीकृष्ण* की भक्ति में अपना शेष जीवन बिताने के लिए,'मीराबाई' बनकर कृष्ण भक्ति की राह पर चलने के लिए हरियाणा सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति(VRS) की मांग की है।कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा काफी समझाने-बुझाने के बाद भी भारती अरोड़ा अपने इस निर्णय पर अटल हैं।हालांकि उनके आवेदन कर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।बताते चलें कि 1998 बैच की आईपीएस अधिकारी भारती अरोड़ा ने अपनी 23 साल की पुलिस सेवा में अलग अलग मामलों को लेकर कई बार सुर्खियाँ बटोरी हैं।भारती अरोड़ा के पति विकास अरोड़ा भी हरियाणा कैडर में आईपीएस अधिकारी हैं।
काफी चर्चित,कर्मठ और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी रहीं,लगभग पचास वर्षीय भारती अरोड़ा अब तीन माह के आवश्यक नोटिस पीरियड तक भी प्रतीक्षा नहीं करना चाह रहीं हैं।भारती अरोड़ा हरियाणा प्रदेश की ऐसी पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अप्लाई किया है।साथ ही इस देश की भी सरकारी सेवा में कार्यरत ऐसी पहली महिला अधिकारी हैं जो इस वजह(भक्तिमय जीवन जीने के लिए) के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले रही हैं।भारती अरोड़ा की भक्ति और त्याग की शक्ति को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।भारती के कथनानुसार - 'वो अब जीवन का लक्ष्य प्राप्त करना चाहती हैं।गुरुनानक देव, चैतन्य महाप्रभु,कबीर,तुलसी,सूर,मीराबाई की राह चलकर ही वो अब अपना शेष जीवन प्रभु श्रीकृष्ण जी की भक्ति में लीन होकर बिताना चाहती हैं।'
*"ऐसी लागी लगन, पांडा-पांडे के बाद 'भारती' हो गई मगन"*
कृष्ण भक्ति की राह पर चलने के लिए अफसरशाही और रूतबा छोड़कर आने वालों की कहानियां कोई नई नहीं हैं।हां इतना जरूर है कि किसी महिला अधिकारी ने देश में ऐसा पहली बार किया है।इससे पहले भी 2005 में उत्तर प्रदेश पुलिस में आईजी रहे व मूलरूप से ओड़िशा के रहने वाले *देवेंद्र किशोर पांडा(डी.के.पांडा)* भी भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में डूबकर राधा बनकर रहने की चाह में खूब खबरों की सुर्खियां बने थे।उन्होंने खुद को 'कृष्ण की राधा' घोषित कर दिया था।नवविवाहिता की तरह श्रृंगार करना और कृष्ण भक्ति में भजन व नृत्य करना यही उनकी पहचान थी।पूर्व आईजी डी.के.पांडा का कहना था कि वह तो 1991 में उसी दिन राधा बन गए थे,जब एक बार उनके सपने में भगवान श्रीकृष्ण ने आकर कहा कि वह पांडा नहीं बल्कि उनकी राधा हैं,उनकी प्रेमिका।1991 से 2005 तक पांडा का ये 'राधा रूप' चोरी छुपे चलता रहा।लेकिन 2005 के बाद पांडा ने अपने हावभाव और परिधान को सार्वजनिक कर दिया था।
वहीं बिहार में पूर्व पुलिस महानिदेशक(DGP) रहे *गुप्तेश्वर पांडे* ने भी राजनीति में आने के लिए सरकारी सेवा से दो बार वीआरएस लिया लेकिन दोनों ही बार मायूसी हाथ लगने पर सियासत से मोह भंग हो गया और कथावाचक की भूमिका में आ गए थे।अपनी नई भूमिका को लेकर उन्होंने भी कहा था कि 'उन्होंने अब अपने आप को पूर्ण रूप से भगवान श्री कृष्ण को समर्पित कर दिया है।इस भूमिका में उनका बहुत मन लग रहा है।आत्मा की खुराक संपूर्ण तो यही है।ठाकुरजी की इच्छा से ही ये सब हो रहा है।'
* (रिपोर्ट शिवम कुुमार अस्थाना) *
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* मीडिया ब्यूरो चीप हरदोई *