*पत्रकार एवं पत्रकारिता संस्थान अधिनियम, 2017 को सन् 2019 में ही मंजूरी मिलने के बाद भी अभी प्रभावी ढंग से लागू क्यों नहीं*
एके बिंदुसार संस्थापक भारतीय मीडिया फाउंडेशन



*महामहिम राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा पारित पत्रकार एवं पत्रकारिता संस्थान ( हिंसा और संपत्ति की क्षति की रोकथाम) 2017 को उसी समय स्वीकृति दे दिया था।*


*प्रमुख बिंदु:*
इस अधिनियम में पत्रकारों या पत्रकारिता संस्थानों के मामले में नुकसान पहुँचाने वाले को 3 साल की सज़ा और 50000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
संस्थानों को किसी भी तरह की क्षति पहुँचाने या पत्रकारों के इलाज़ का व्यय अभियुक्त द्वारा ही वहन किया जाएगा।
इस अधिनियम के अनुसार, पत्रकारों पर हमला करना गैर- ज़मानती अपराध की श्रेणी में आएगा।
इसके तहत संविदा पर काम करने वाले पत्रकारों को भी सुरक्षा प्रदान की गई है।
साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिये इस तरह के कानून को पारित करने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य बन गया था।
अधिनियम के तहत इस तरह के मामलों की जाँच पुलिस उपाधीक्षक या उससे उच्च स्तर का अधिकारी द्वारा ही किये जाने का प्रावधान है।
झूठी शिकायतों या अधिनियम का गलत इस्तेमाल किये जाने पर पत्रकारों के विरुद्ध भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
पत्रकार सुरक्षा अधिनियम की आवश्यकता क्यों?
हाल ही में देश भर में पत्रकारों पर हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है, फलस्वरूप कई पत्रकार संगठन लंबे समय से इस तरह के क़ानून की मांग कर रहे थे।
अंतर्राष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (Reporters Without Borders) के प्रेस फ्रीडम इंडेक्स (World Press Freesom index) 2019 में भारत को 180 देशों में 140वाँ स्थान दिया गया था।
इस सूचकांक में 2017 में भारत 136वें स्थान पर था, वहीं 2018 में इसे 138वें स्थान पर रखा गया था।
इस सूचकांक के अनुसार नॉर्वे, फ़िनलैंड और स्वीडन क्रमशः पहले दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
खास रिपोर्ट जीतेन्द्र तिवारी 
सम्पादक क्राइम खुलासा न्यूज
09919321023,6306439722
Previous Post Next Post