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कम्युनिटी पुलिसिंग बोर्ड के महासमन्वयक व मुख्य नियन्त्रक श्री गजराज आचार्य के नेतृत्त्व में देशभर के कई राज्यो में प्रकाशपर्व पर गुरु गोविंदसिंह जी की मनाई गई जयन्ती ।

आज गुरु गोविंद सिंह जी के विचारों को जन जन तक पंहुचाने की आवश्यकता है - श्री गजराज आचार्य


देश मे अपराधों की रोकथाम व मानवाधिकार सहायता केन्द्रों के जरिये समाज मे बढ़ते अत्याचारों पर परामर्शी सेवाएं देने के लिए प्रसिद्व स्वतन्त्र शासी निकाय कम्युनिटी पुलिसिंग बोर्ड के महासमन्वयक एवं मुख्य नियन्त्रक श्री गजराज आचार्य के दिशा निर्देशानुसार कई राज्यों ने प्रकाश पर्व मनाया गया । श्री गजराज आचार्य ने इस संवाददाता को बताया कि गुरू गोबिन्द सिंह ने सिखों की पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया तथा उन्हें गुरु रूप में सुशोभित किया। बिचित्र नाटक को उनकी आत्मकथा माना जाता है। यही उनके जीवन के विषय में जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। यह दसम ग्रन्थ का एक भाग है। दसम ग्रन्थ, गुरू गोबिन्द सिंह की कृतियों के संकलन का नाम है। गुरु गोविन्द सिंह जी ने मुगलों और उनके सहयोगियों (जैसे, शिवालिक पहाडियों के राजा) के साथ कई युद्ध लड़े। धर्म के लिए समस्त परिवार का बलिदान उन्होंने किया । जिसके लिए उन्हे 'सरबंसदानी' (सर्ववंशदानी) भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त जनसाधारण में वे कलगीधर, दशमेश, बाजांवाले आदि कई नाम, उपनाम व उपाधियों से भी जाने जाते हैं।
गुरु गोविंद सिंह जहां विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय थे, वहीं वे स्वयं एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा संस्कृत सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की। वे विद्वानों के संरक्षक थे। उनके दरबार में देश के प्रसिद्व कवियों तथा लेखकों की उपस्थिति रहती थी, इसीलिए उन्हें 'संत सिपाही' भी कहा जाता था। वे भक्ति तथा शक्ति के अद्वितीय संगम थे। उन्होंने सदा प्रेम, एकता, भाईचारे का संदेश दिया। किसी ने गुरुजी का अहित करने की कोशिश भी की तो उन्होंने अपनी सहनशीलता, मधुरता, सौम्यता से उसे परास्त कर दिया। गुरुजी की मान्यता थी कि मनुष्य को किसी को डराना भी नहीं चाहिए और न किसी से डरना चाहिए। वे अपनी वाणी में उपदेश देते हैं भै काहू को देत नहि, नहि भय मानत आन। वे बाल्यकाल से ही सरल, सहज, भक्ति-भाव वाले कर्मयोगी थे। उनकी वाणी में मधुरता, सादगी, सौजन्यता एवं वैराग्य की भावना कूट-कूटकर भरी थी। श्री आचार्य जी ने कहा कि उनके जीवन का प्रथम दर्शन ही था कि धर्म का मार्ग सत्य का मार्ग है और सत्य की सदैव विजय होती है।
आज देशभर में गुरु गोविन्द सिंह जी के जीवन चरित्र का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार करके काफी सामाजिक अपराधों  व अत्याचारों को रोका जा सकता है।
रिपोर्टिंग :- जितेन्द्र कुमार तिवारी
सहायक राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी - नेशनल कम्युनिटी पुलिसिंग बोर्ड
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