विश्व धरोहर सप्ताह :- 

विश्व धरोहर सप्ताह के अन्तर्गत आयोजित वर्चुअल गोष्ठी -
वैभवशाली एवं समृद्ध पुरातात्विक खजाने का गढ है ललितपुर- अलया

(ललितपुर)करुणा इंटरनेशनल ललितपुर केंद्र की 19 से 25 नवम्बर तक मनाये जाने वाले विश्व धरोहर सप्ताह के अन्तर्गत वर्चुअल गोष्ठी अक्षय अलया की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें वक्ताओं ने जनपद ललितपुर की समृद्ध पुरासंपदा,पर्यटन स्थलों, देवालयों पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया।इस विषय पर वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे।अध्यक्षता करते हुए करूणा इंटरनेशनल ललितपुर केंद्र के संरक्षक अक्षय अलया ने कहा कि अतुल्य भारत की ललित नगरी ललितपुर अपने दामन में अकूत पुरा संपदा का वैभव संजोंये हुए है।जिसे देखने के लिए सात समंदर पार से भी अनेकों विदेशी सैलानी वर्वश खिंचे चले आते हैं।लेकिन दु:ख की बात यह है कि पुरा संपदा यत्र -तत्र सर्वत्र विखरी हुई है।इस अमूल्य संपदा को सहेजने की दिशा में यथोचित ठोस कारगर उपाय नहीं किए गए हैं।जिसके चलते आज भी हजारों पुरा आकृतियां अपने उद्धार की आस में टकटकी लगायें वेवश आंखों से देख रहीं हैं।अलया ने स्कूली पाठ्यक्रम में अन्य विषयों की भांति हीं 'अपनी विरासत को जानों' विषयक पाठ्यक्रम भी सम्मिलित किए जाने की आवश्यकता पर तीव्र बल दिया,जिससे बच्चों में अपनी पुरा धरोहर के विषय में विस्तृत जानकारी होने के साथ-साथ उनके संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति भी कर्तव्य एवं प्रेम भावना जागृत हो सकें।सेवानिवृत्त प्रवक्ता रमेश चंद्र जैन ने कहा कि हम अपनी धरोंहरों का संरक्षण करेंगें,तभी हमारी विरासत सुरक्षित रहेगी,हमें अपनी धरोहर को सुरक्षित रखकर भारत देश का नाम सर्वोच्च पद पर लाना है।विश्व धरोहर सप्ताह के अन्तर्गत हमें शपथ लेना है कि हम पुरा धरोहरों व विरासतों का संरक्षण करेंगे।महामंत्री ध्रुव साहू ने कहा कि हमारा देश प्राचीन परम्पराओं,रीतिरिवाजों व संस्कृति व अकूत धरोंहरों से अत्यंत समृद्ध है,इन्हीं धरोंहरों के कारण हमारा देश सोने की चिडिया कहा जाता था। 
किंतु वर्तमान परिवेश में हमारे देश में मौजूद धरोहरों को संरक्षित करने की महती आवश्यकता है।जिससे कि हमारे अतीत का गौरव अक्षुण्ण रह सके। हमें अपने अतीत के गौरव को संजोकर रखने की नितांत आवश्यकता है। करुणा इंटरनेशनल के संयोजक पुष्पेंद्र जैन ने जनपद ललितपुर में प्रतिष्ठित पुरा वैभव के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि यहां के शिल्प सौंदर्य को देखकर ऐसा लगता है कि देवता रुपी शिल्पी ने पत्थर को मोंम बनाकर फिर उसे पिघलाकर अपनी जादुई उगलियों से गढा हों।ये प्राचीन धरोहरें हमें अपने ऊपर गर्व करने के साथ-साथ अतीत की उच्च वास्तुकला निर्माण की शैली से अवगत कराने के साथ-साथ वैसी ही जानकारी देतें हैं जैसे हमारे नाना-नानी ,दादा-दादी देते आयें हैं।उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति व विरासत को संरक्षित करना वेहद जरूरी है,ललितपुर जनपद उत्तर-प्रदेश में पुरा विरासत में अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है।यहाँ पर देश व विदेश के सैलानी आते हैं व जनपद की पुरातत्व शैली व पुरातत्व स्थल सैलानियों का मनमोह लेते हैं।विरासत संरक्षण के साथ-साथ हमें जनपद में मौजूद प्राकृतिक सुंदरता को बचाने की महती आवश्यकता है। हरिशंकर सोनी ने कहा कि वर्तमान परिवेश में अपने रीति-रिवाज,परम्पराऐं,संस्कृति एवं विरासत को हर हाल में संरक्षित करना है ,हमारे पूर्वजों ने जो विरासत हमें सौंपी है हमें वैसी ही आने वाली पीढी को सौंपना है, हमारी प्राचीन संस्कृति ,विरासत हमारे गौरव की निशानी हैं इस गौरव को हम युवा पीढी को जागरूक करके बचा सकते हैं। विश्व धरोहर सप्ताह मनाने का उद्देश्य है मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए आगे आने वाली पीढियों के लिए बचाकर रखा जा सके,उन्होंने कहा कि अपने जनपद में विखरी हुई विरासत को संरक्षित करने की महती आवश्यकता है, हमारे जनपद में पुरा विरासत की कमी नहीं है ,हमारी प्राचीन विरासत हमारी पहचान है जो हमको हमारे स्वर्णिम अतीत की याद दिलाती है। डां० राकेश सिंघई ने बताया कि जनपद ललितपुर में अन्य स्थानों की अपेक्षा सर्वाधिक पुरासंपदा वैदिक रीति रिवाज एवं मनीषियों द्वारा रची गई विधाऐं हमारे संस्कारों में रची बसी हैं।हम अपनी आने वाली पीढियों को विरासत में देने के लिए नौनिहालों को इस प्रकार शिक्षित और सुसंस्कारित करें जिससे भारत का विश्व गुरु होने का गौरव पुनः प्रतिष्ठित हो सके।जनपद में पुरासंपदा के स्थलों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि हमारे ललितपुर जनपद में प्राचीन धरोंहरों की कमी नहीं हैं जहाँ उत्तर-प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीमा पर सुदूर अंचल में सुरम्य स्थल विकास खंड मडा़वरा के ग्राम मदनपुर में आल्हा-ऊदल की बैठक है तो वहीं पर जैनियों का तीर्थक्षेत्र पंचपहाडी पर भगवान शांतिनाथ की विशालतम मूर्ति स्थापित है जो एक अनुपम छटा विखेरें हुए है,मडा़वरा के समीपस्थ आठ किलोमीटर की दूरी पर प्रसिद्ध जैन तीर्थ सीरोंन जी है जहाँ पर सैकडों खंडित मूर्तियां संग्रहालय में रखी हुई हैं।विश्वप्रसिद्ध दशावतार मंदिर देवगढ व जैन मंदिर,तालबेहट के समीप झूमरनाथ,देवामाता,पाली के समीप नीलकंठेश्वर,मध्य-प्रदेश की सीमा पर स्थित अमझरा घाटी ,बार के तालाब की सीढियां जो जिन्नों द्वारा बनवाई गई ,बाबा सदनशाह,सुम्मेरा तालाब,सौंरई ,मडा़वरा, बानपुर,बार तालबेहट के किला जो हमारे जनपद की अमूल्य धरोहरें ही हैं,अनेक तीर्थक्षेत्र हमारे जनपद की अमूल्य धरोहर है,मंदिर हमारी विरासत के ही अंग हैं।प्राचार्य केपी पांडे ने कहा कि हमारे बुंदेलखंड में पुरा विरासत की कमी नहीं है ,वल्कि पुराविरासत को संजोयें रखने की जरुरत है पुराविरासत हमारी संस्कृति और गौरव गाथाओं की धोतक है,हमारे देश के इतिहास और अमर कहानियों का केंद्र बिंदु भी देश की यहीं विरासत विशिष्ट स्मारकों और मंदिरो के रूप में सुदृढ़ संस्कृति का बखान करती है। हमें पर्यावरण की रक्षा व नदियों के संरक्षण के साथ-साथ पुरा संपदा ,रीति-रिवाज ,लोकनृत्य एवं वनों षधि के संरक्षण का भी प्रयास करने की दिशा में कदम उठाने की भी नितांत आवश्यकता है।गोष्ठी का संचालन ध्रुव साहू ने किया।वर्चुअल गोष्ठी में अक्षय अलया,केपी पांडे,अंतिम जैन,पुष्पेंद्र जैन,शैलेष तिवारी, वृजेश कुशवाहा,अरुण तिवारी,हरिशंकर सोनी,देवीशंकर कुशवाहा ने विचार रखे।

फोटों कैप्सन -
01- दशावतार मंदिर देवगढ

02- जैन मंदिर देवगढ जी 

03- भगवान ऋषभदेव जैन तीर्थ सीरोंन जी मडावरा

क्राइम खुलासा न्यूज़ ललितपुर से जिला ब्यूरो
पं रामजी तिवारी मडावरा
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