◆◆◆◆ जो सत्य को समझ गया वहीं
सिद्ध बन गया - अंतरमति
●●●● भगवान पुष्पदंत का मनाया गया निर्वाण कल्याणक,श्रद्धालुओं ने समर्पित किए निर्वाण लाडू -
सर्वोदय बालिका मंडल को मिला पूजन करने का सौभाग्य -
【"उत्तम सत्य व्रत पालीजे,पर विश्वासघात न कीजे "-】
(ललितपुर) वर्णीनगर मडा़वरा में पर्वराज पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म के अवसर पर आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के मंगल आर्शीर्वाद एवं प्रतिभा स्थली प्रणेता आर्यिका मां आदर्शमति माता जी की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका श्री 105 अंतरमति माता जी ससंघ के सानिध्य में नगर की ह्रदय स्थली श्री महावीर विद्याविहार के परिसर में प्रतिदिन प्रात:काल श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन,दशलक्षण विधान एवं दोपहर में तत्वार्थ सूत्र का वाचन आदि धार्मिक क्रियायें सम्पन्न की जा रही हैं। आज की पूजन करने का सौभाग्य सर्वोदय बालिका मंडल को प्राप्त हुआ। भगवान पुष्पदंत की विशेष पूजन की गई और श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू भी चढाया। शांतिधारा करने का सौभाग्य चातुर्मास समिति के कार्याध्यक्ष चौधरी अभिनंदन जैन,कोषाध्यक्ष नीलेश जैन,मयूराज जैन,कमलेश जैन,प्रतीक जैन लुहर्रा,नरेंद्र कुमार,अविनाश सिलोनिया,शांति कुमार,राहुल कुमार सेठी,कोमल चंद्र ,अरविंद जैन गौना परिवार को प्राप्त हुआ। संध्या काल में विभिन्न धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए।उत्तम सत्य धर्म पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री अंतरमति माता जी ने कहा कि सत्य धर्म हमें झूठ से बचना सिखाता है,झूठ बोलने से हमें दुर्गति ही मिलती है। सत्य का अर्थ है -सदा सत्य बोलना। सत्य के मार्ग पर चलकर व्यक्ति धर्म के पथ पर चलता है। दूसरों के मन को संताप उत्पन्न करने वाले निष्ठुर,कर्कश और कठोर वचनों का त्याग कर सबके हितकारी और प्रिय वचन बोलना उत्तम सत्य धर्म है।हमें सत्य मार्ग को अपनाने के लिए झूठ का त्याग करना होगा।एक झूठ हमें पतन के रास्ते पर ही ले जाता है।हम सत्य के रास्ते पर चलकर ही सत्य धर्म का पालन कर सकते हैं। जो व्यक्ति सत्य को समझ गया वह सिद्ध बन गया अर्थात वह सत्य के मार्ग पर चलकर सत्य की खोज में निकल पडता है।कहा भी गया है -सत्य हमें सन्मार्ग पर ले जाता है।कार्यक्रम का संचालन डां० राकेश जैन सिंघई व प्रदीप जैन खुटगुंवा ने संयुक्त रूप से किया।
फोटों कैप्सन-
01- शांतिधारा करते हुए श्रावकगण -
02- सर्वोदय बालिका मंडल की सदस्य पूजन करते हुए
03- धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका अंतरमति माता जीजी
*पं रामजी तिवारी मडावरा*