हिंदीं विश्व भाषा बन चुकी हैं-- प्रोफेसर डॉ अखिलेश शर्मा महाराष्ट्र
हिंदीं संस्कार,विचार,भविष्य की संकल्पना है-- प्रोफेसर डॉ रामचन्द्र कुरुक्षेत्र
हिंदी सम्पूर्ण विश्व को एक सूत्र में बांधे हुए है-- आचार्य शिवेदव आर्य गुरूकुल पौंधा देहरादून
महरौनी(ललितपुर)- महर्षि दयानन्द सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी के तत्वाधान में सम्पूर्ण आर्यावर्त को एक सूत्र में पिरोने वाली हिंदी भाषा आखिर कब बनेगी राष्ट्र भाषा ? विषय पर ऑनलाइन वेविनार का आयोजन संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य द्वारा किया गया ।
मुख्य वक्ता डॉ अखिलेश शर्मा संस्कृत विभाग मूलजी जेठा महाविद्यालय जलगांव महाराष्ट्र ने कहा कि
हिंदी जन-जन की भाषा है लाखों करोड़ों लोगों की भाषा है इसलिए वह स्वयं ही राष्ट्रभाषा नहीं अपितु विश्व भाषा बन चुकी है।
परंतु जब तक प्रशासन में न्याय व्यवस्था में सेना में विज्ञान की पुस्तकों में बड़ी बड़ी गोष्ठियों संगोष्ठियों में विद्यालयों में महाविद्यालयों में आम जनमानस में दुकानों के ऊपर लिखी गई पट्टिकाओं में कारखानों द्वारा उत्पन्न किए गए पदार्थों के ऊपर देवनागरी लिपि एवं हिंदी भाषा का प्रयोग हमें करना ही होगा तभी हम वास्तव में हिंदी को विश्व भाषा बना पाएंगे।
अध्यक्षता डॉ रामचन्द्र अध्यक्ष संस्कृत एवं दर्शन विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र ने कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम मात्र नहीं है, यह हमारे संस्कार, विचार और भविष्य की समस्त संकल्पना का आधार होती है। हिन्दी दिवस हमें अपनी प्यारी हिंदी के प्रति अपने स्नेह, सम्मान एवं जिम्मेदारी को स्मरण कराने का दिन है। हिन्दी राजभाषा है और शीघ्र ही राष्ट्रभाषा के गौरव पद पर भी अधिष्ठित होगी। आज का दिन हिन्दी के सामूहिक उत्थान का संकल्प दिवस है। खिचड़ी और हिंग्लिश हिन्दी से बचकर संस्कृत से अनुप्रेरित हिन्दी बोलने का संकल्प लें। अपने घर और कार्यालय के नामपट हिन्दी में लगायें। हस्ताक्षर हिन्दी में करें। नई पीढ़ी को शुद्ध हिन्दी उत्तराधिकार में प्रदान करें। भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति के माध्यम से हिंदी और भारतीय भाषाओं को व्यापक फलक प्रदान किया है वह अभिनन्दनीय है।
सारस्वत अतिथि आचार्य शिवेदव आर्य गुरूकुल पौंधा देहरादून ने कहा कि हिंदी ही सम्पूर्ण विश्व को एक सूत्र में बांध सकती है महर्षि दयानन्द सरस्वती गुजराती एवं उनकी भाषा संस्कृत होने के बाबजूद भी उन्होंने हिंदी को आर्यभाषा से विभूषित करके सभी अपने ग्रन्थ जैसे अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश आदि हिंदी भाषा मे लिखकर मानव व राष्ट्र का कल्याण किया।
राष्ट्रीय कवि बलराम श्रीवास्तव शिक्षक मैनपुरी ने गीत के माध्यम कहा कि "वे कैसे इंसान,जिन्हें हिंदी से प्यार नही" ?
श्रीमती विद्योत्तमा वर्मा सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी जोधपुर राजस्थान ने कहा कि हमे अपने परिवार में संस्कार, सुख और समृद्धि लाना है हमें अपनी पुरातन संस्कृति की ओर लौटना होगा।
डॉ श्वेतकेतु शर्मा बरेली,कवि नेमिचन्द्र व्योम शिक्षाविद छिंदवाड़ा,प्रवीण मैढ़ सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी जोधपुर राजस्थान ने हिंदी भाषा को अपने जीवन मे अपने पर जोर दिया।
वेविनार में मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ, पत्रकार अजय श्रीवास्तव साईं ज्योति संस्था, डॉ राजेन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव प्राचार्य करकरुआ,मनोज तिवारी टाटा प्रधानाचार्य, हेमन्त सेन ललितपुर,शशिकांत मिश्र,ध्यान सिंह यादव एवं पारसमणि पुरोहित मिदरवाहा, अवकाश मिश्र फौजी,भरत कन्नौज,शिक्षक भवानी शंकर लोधी मड़ावरा, पत्रकार श्रीराम सेन सिवनी,शिवदत्त गुप्ता बरेली,रामसेवक निरंजन शिक्षक,अवधेश प्रताप सिंह बैस,कपिल आर्य शिक्षक,शैलेश सविता ग्राम प्रधान अलीगढ़,शिवकुमार यादव बिजौर, नरेश यादव मुम्बई,आकृति शर्मा,प्रदीप वर्मा शिक्षक,जितेंद्र शर्मा शिक्षक प्रयागराज,अविका सेन आर्य,राजकुमारी संज्ञा,आंशिक संज्ञा,दीपक सेन मड़ावरा,छमाधर अहिरवार शिक्षक, परमानंद सोनी आर्य सहित सैकड़ों आर्यजन उपस्थिति रहें।
संचालन संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य एवं आभार मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ ने जताया।
*पं रामजी तिवारी मडावरा*
*जिला ब्यूरो क्राइम खुलासा न्यूज़ ललितपुर*