इंद्रियों पर रखे संयम :- अंतरमति
"उत्तम संयम पालैं ज्ञाता,नर-भव सफल करै ले साता"-
वर्णी व्यायामशाला संस्था को मिला अष्ट द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य -
मडावरा (ललितपुर) वर्णीनगर मडा़वरा में पर्वराज पर्यूषण पर्व के छठवें दिन उत्तम संयम धर्म उत्साह पूर्वक मनाया गया। आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका रत्न 105 अंतरमति माता जी, ससंघ के पावन सानिध्य में श्री महावीर विद्याविहार के परिसर में प्रात:काल ध्यान की कक्षा लगायी गई। दैनिक नित्य क्रियाओं में श्री जी का अभिषेक,शांतिधारा सम्पन्न हुई। शांतिधारा करने का सौभाग्य घनश्यामदास,आलोक कुमार,आशीष जैन,अभिषेक जैन डोंगरा,दीपचंद्र,ऋषि कुमार,डां० निर्देश जैन,पंचम जैन,रिंकेश,रुपेश जैन दुकान वाला परिवार,प्रमोद कुमार,धर्मेंद्र कुमार,भूपेंद्र कुमार कुम्हैडी,इंद्र कुमार जैन कुसमाड परिवार को मिला।पूजन करने का सौभाग्य वर्णी व्यायाम शाला के सदस्यों को मिला।संगीतमयी पूजन में महावीर जिनालय के संगीत टीम के निर्मल कुमार,अजित कुमार जैन,राजेश कुमार जैन रजौला ने बुंदेलखंडी भाषा में भक्तिमय पूजन कराने में विशेष सहयोग दिया।संगीतमयी दशलक्षण पूजन ,विधान सम्पन्न हुए। दशलक्षण महापर्व के छठवें दिवस उत्तम संयम धर्म पर आर्यिका रत्न 105 अंतरमति माता जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संयम को धारण करके व्यक्ति महान बनता है। दिगम्बर मुनिराज संयम को धारण करके आज संयम के पथ पर चल रहे हैं।इंद्रियों पर संयम रखकर ही व्यक्ति संयम के पथ पर चल सकता है। पांचों इंद्रियों पर आत्म नियंत्रण एवं मन की प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखना और काय के जीवों की विराधना न करना उत्तम संयम है।इंद्रियों पर संयम रखना ही संयम धर्म का पालन करना है। संयम के पथ पर चलकर ही व्यक्ति संयम पथ को प्राप्त कर सकता है।कार्यक्रम का संचालन डां० राकेश जैन सिंघई व प्रदीप जैन खुटगुंवा ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान सकल दिगम्बर जैन समाज मडा़वरा के श्रद्धालु एवं नगर में संचालित स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारीगण मौजूद रहे।
दोपहर में तत्वार्थसूत्र के दस अध्यायों का वाचन कर अर्घ समर्पित किए गए। सायंकाल में आर्यिका श्री के मुखारविंद से सामूहिक प्रतिक्रमण हुआ।
प्रतिक्रमण के माध्यम से प्रकृति के समस्त जीवों से क्षमा याचना की गई। तत्पश्चात सायंकालीन संगीतमयी आरती जैन युवा जागृति सेवा समिति के म्यूजिक डायरेक्टर धर्मेंद्र सराफ,प्रदीप सिंघई,प्रदीप घिया के निर्देशन में आयोजित की गई। तत्पश्चात उदासीन आश्रम इंदौर से पधारी हुई ब्रह्मचारिणी शशि दीदी के उत्तम संयम धर्म पर मार्मिक उद् बोधन हुए।रात्रि में संस्कृति सराफ के निर्देशन में सती अंजना नाटिका का मंचन किया गया।
सुगंध दशमी व्रत आज :-
चातुर्मास समिति के महामंत्री डां० राकेश सिंघई ने जानकारी देते हुए बताया कि सुगंध दसमीं का व्रत सौभाग्यवती महिलाएं रखती हैं।इस दिन महिलाएं उपवास रखकर व्रत का पालन करती हैं।मंदिर में बैठकर स्वाध्याय करती हैं व सुगंध दशमी व्रत की कथा आपस में बैठकर सुनती हैं।इस कथा में बताया गया है कि रानी मनोरमा ने मुनि निंदा की थी जिस कारण से उन्होंनें मरकर दुर्गंधा नाम की कन्या के रुप में जन्म लिया था।जब उस कन्या की शादी हुई उसके पिता ने मुनि श्री से अपने पूर्वभव के बारे में पूछा तो मुनिश्री ने कहा कि तुम्हारी पुत्री ने पूर्वभव में मुनिराज की निंदा की थी। रानी मनोरमा ने मुनि निंदा की थी जिस कारण से दुर्गंधा नाम की कन्या के रूप जन्म लिया है।इसलिए इसके शरीर से बहुत दुर्गंध आती है। दुर्गंधा के पिता ने मुनिराज से इस कष्ट का निवारण पूछा तो मुनिराज ने उपाय बताया कि तुम्हारी पुत्री सुगंध दशमी के व्रत का पालन करे,जिससे तुम्हारें कर्मों का क्षय होगा।वह व्रत का पालन करने से दुर्गंधा नाम की कन्या बिल्कुल ठीक हो जायेगी।उसी समय से महिलाएं सुगंध दशमी का उपवास रखकर व्रत का पालन करने लगी।
जिला ब्यूरो क्राइम खुलासा न्यूज़ ललितपुर
फोटों कैप्सन -
01- दीप प्रज्वलित करते हुए वर्णी व्यायाम शाला के पदाधिकारी
02- अष्ट द्रव्य से दशलक्षण पूजन करते हुए श्रावक
03- आर्यिका संघ नगर के जिनालय के दर्शनार्थ जाते हुए-