महरौनी(ललितपुर)- महर्षि दयानन्द सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी के तत्वावधान में ज़ूम एप पर आयोजित पांच दिवसीय वैदिक धर्म प्रचार महोत्सव में मुख्य वक्ता भवदेव शास्त्री अजमेर ने कई प्रांतों से जुड़े हुए श्रोताओं को संबोधित करते हुए वर्ण व्यवस्था की व्याख्या की उन्होंने बताया कि वर्ण का अर्थ है अपने रोजगार को चुनना, दुनिया में जितने भी काम हैं उन कामों को चार भागों में बांटा गया है, शिक्षा, रक्षा ,व्यापार, व सेवा। शिक्षा का काम करने वाला व्यक्ति ब्राह्मण कहलाता है ,रक्षा का काम करने वाला व्यक्ति क्षत्रिय कहलाता है, व्यापार करने वाला व्यक्ति वैश्य कहलाता है, और मजदूरी करने वाला व्यक्ति शूद्र कहलाता है मनुस्मृति में कहीं पर भी जाति व्यवस्था नहीं है और इन वर्णों में न कोई छोटा है ,ना कोई बड़ा है वर्ण व्यवस्था जन्म से न होकर के कर्म से मानी गई है, जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसका वही वर्ण हो जाता है। यह व्यवस्था प्राचीन काल से चली आ रही है वर्तमान में भी चल रही है और आगे भी चलती रहेगी। वर्ण व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपनी योग्यता के अनुसार किसी भी वर्ण के अनुसार कार्य कर सकता है उन्होंने बताया कि जातिवाद छुआछूत भेदभाव यह हम सभी मनुष्यों की कमजोरी है एवं जातिवाद आदि कुरीतिया समाप्त होनी चाहिए। मनुस्मृति में जाति आधारित वर्ण व्यवस्था नहीं है अपितु कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था है वर्ण व्यवस्था को सही ढंग से न समझने के कारण से लोगों में भ्रम पैदा हो गया है।
प्रोफेसर डॉ रंजन लता आर्य गोरखपुर ने कहा कि हम सभी को वैदिक धर्म के मर्म को समझने की आवश्यकता हैं।
आयोजन को सफल बनाने में प्रधान आर्य समाज मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य,रजनी कांत सेन शिक्षक चित्रकूट,कपिल आर्य शिक्षक हमीरपुर,शिव कुमार यादव बिजौर, भारतीय सैनिक अवकांश मिश्र कन्नौज,प्रकाश वीर यादव एटा,योगेश यादव एटा,आचार्य सत्यम आर्य आदि का सहयोग प्राप्त हो रहा हैं।
संचालन संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य एवं आभार राम कुमार दुबे शिक्षक जुदैनया रुकवाहा ने जताया।
*रिपोर्ट_रामजी तिवारी जिला ब्यूरो क्राइम खुलासा न्यूज़ ललितपुर*