लखनऊ के जाने माने पत्रकार *अखिलेश कृष्ण मोहन* संजय गांधी पीजीआई लखनऊ में अंततः कोरोना से संघर्ष करते-करते जिंदगी की जंग हार गए। वह 38 वर्ष के थे। उनके इलाज के लिए संजय गांधी पीजीआई के डायरेक्टर सहित कई डॉक्टर और योगी सरकार के कई मंत्री व्यक्तिगत लगे रहे। लेकिन बचाया नहीं जा सका। वह अपने पीछे अपनी पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। 

 वह कोरना के नकारवादी पत्रकार थे और कोरोना  को साजिश मानने वालों में से थे। वह वैक्सीन के भी विरोधी थे। इस घटना से हमें सबक लेना चाहिए। जो लोग कोरोना के अस्तित्व को नकार रहे हैं और वैक्सीन का  विरोध कर रहे हैं। उनको संभल जाना चाहिए।
أحدث أقدم